मधुमक्खी पालन का व्यापार कैसे शुरू करें 2022-2023 साल में।

मधुमक्खी पालन एक कृषि आधारित उद्यम है, जिसे किसान अतिरिक्त आय अर्जित करने के लिए अपना सकते हैं। मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो खेती किसानी से जुड़े लोग या फिर कोई अन्य लोग इस व्यवसाय को अपनाकर एक साल में लाखों की कमाई कर सकते है।

मधुमक्खियां फूलों के रस को शहद में बदल देती हैं और उन्हें अपने छत्तों में जमा करती हैं। मधुमक्खी पालन के उत्पाद के रूप में शहद और मोम आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इस व्यवसाय में कम लागत और कम पूंजी लगाकर ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है।

(मौन) मधुमक्खी पालन व्यवसाय हेतु प्रजातियां।

एपिस सिराना इंडिका– इसे भारतीय मौन के नाम से जाना जाता है।

एपिस मैली फेरा— इसे इटैलियन मधुमक्खी के नाम से जाना जाता है।

मौन गृह खरीदते समय ध्यान देने वाली बाते मौन गृह मोटी और गन्ध रहित लकड़ी के बने हो। मौन गृह में एक स्वस्थ रानी हो। मौन गृह में पर्याप्त मात्रा में मकरंद व पराग हो। मौन गृह में 5-6 फ्रेम मधुमक्खी, अंडा, लारवा व प्यूपा से भरी हो ।

बक्सों के स्थानातरंण का कार्य रात में ही करना चाहिए। मौन गृह रखरखाव बॉक्स को छायादार स्थान पर रखे। बरसात के समय मौन गृह को ऊँचे और खुले स्थान में रखे। आस-पास की घास इत्यादि साफ़ करते रहे।

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भोजन न होने पर 50 प्रतिशत चीनी की चाशनी बना कर दे। व्यवसाय को शुरू करने के लिए इन चीजों की पड़ती हैं जरूरत- खुली जगह की आवश्यकता होती है, जहां पर आप मधुमक्खियों के पालन के लिए पेटियां रख सके।

लकड़ी के बने बक्से मुंह रक्षक जाली रानी मक्खी हाथों के लिए दस्ताने धुंआदानी समेत औजारों की आवश्यकता पड़ती है।

अगर आप दोशो से तीनशो पेटियां मधुमक्खियां पालते हैं तो आपको 4000 से 5000 स्क्वायर फीट की जमीन लेनी पड़ती है।

जिसकी कीमत आपको लगभग 9 लाख से 10 लाख रुपये तक पड़ जाएगी। आप अपने व्यापार के अनुसार जगह ले सकते है।

मधुमक्खी पालन का उत्पादन प्रक्रिया।

मधुमक्खियां खेत या घर में बक्सों में पाली जा सकती हैं। मधुमक्खी पालन के लिए अवश्यक सामग्री- मौन पेटिका, मधु निष्कासन यंत्र, स्टैंड, छीलन छुरी, छत्ताधार, रानी रोक पट, हाईवे टूल (खुरपी), रानी रोक द्वार, नकाब, रानी कोष्ठ रक्षण यंत्र, दस्ताने, भोजन पात्र, धुआंकर और ब्रुश. छत्तों की स्थापना-सभी बक्से खुली और सूखी जगहों पर होने चाहिए।

मधुमक्खी पालन का व्यापार
मधुमक्खी पालन का व्यापार

यदि यह स्थान किसी बगीचे के आसपास हो तो और भी अच्छा होगा। बगीचे में पराग, रस और पानी का पर्याप्त स्रोत हो। मधुमक्खियों की कॉलोनी की स्थापना-मधुमक्खी कॉलोनी की स्थापना के लिए मधुमक्खी किसी जंगली छत्तों की कॉलोनी से लेकर उसे छत्ते में स्थानांतरित किया जा सकता है या फिर उधर से गुजरनेवाली मधुमक्खियों के झुंड को आकर्षित किया जा सकता है।

कॉलोनियों का प्रबंधन-मधुमक्खी के छत्तों का शहद टपकने के मौसम में, खासकर सुबह के समय सप्ताह में कम से कम एक बार निरीक्षण करें।

कॉलोनियों पर नियमित निगाह रखें और देखते रहें कि स्वस्थ रानी, छत्ते का विकास, शहद का भंडारण, पराग कण की मौजूदगी, रानी का घर और मधुमक्खियों की संख्या तथा छत्तों के कोष्ठों का विकास हो रहा है।

मधुमक्खी पालन का आर्थिक आय-व्यय विवरण।

मधुमक्खी पालन का महत्व फलों, तरकारियों, दलहनी, तिलहनी फसलों पर परागण के द्वारा उपज की बढ़ोत्तरी तो होती ही है, इसके साथ-साथ इसके द्वारा उत्पादित मधु, मोम का लाभ भी मिलता है।

स्थापना के प्रथम वर्ष में तीन मौन वंश से दो अतिरिक्त मौन वंश एवं 20-25 किलोग्राम मधु का उत्पादन करके लगभग 2000 से 2500 रूपये की आय प्रति वर्ष होती है।

दूसरे वर्ष में केवल 300 से 350 रूपये व्यय करके मधु का उत्पादन करके लगभग 3500 रूपये से 4000 रूपये तक की प्रतिवर्ष आय की जा सकती है।

मधुमक्खी पालन द्वारा उत्पन्न शहद का उपयोग।

शहर का आयुर्वेदिक तथा यूनानी दवाओं के रूप में उपयोग किया जाता है। यह रक्त शोधक होता है। आंख, गले व जीभ के छालों को ठीक करता है। शरीर को शक्ति प्रदान करता है।

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